१ (ऐकम) से १५ (पुनम) तक खेतलाजी महाराज के दरबार मे विवाह की जात ,जडोलिया की जात लगा वे बहुत श्रेष्ठ है, जिस भक्त के सोनाणा खेतलाजी कुल देवता है उस जात देना अनिवार्य है, विवाह के बाद शादी की जात देनी पडती है ओर पहला लडका होने पर उस बच्चे के सवा वर्ष, या सवा पाच वर्ष के बाल जडोलिया देना पडता है, बच्चे के पुरे बाल खेतलाजी महाराज को ओर चोटी, माताजी (कुलदेवी) को चढती हैं

विवाह की जात – (शेराबन्दी)
३०० ग्राम मक्की के बाकले
३०० ग्राम तल की तलवट
३०० ग्राम आटाका चुरमा इससे ज्यादा ईच्छानुसार
ओर पुरा पुजापा का पुरा सामान

जडोलियाकी जात -(बाबरी,चटीयो)
३०० ग्राम गेहु की गुगंरी
३०० ग्राम आटा की मातर
३०० ग्राम आटा का चुरमा इससे ज्यादा ईच्छानुसार
ओर पुरा पुजापा का सामान

अगर आपकी दोनो जात बाकी है तो आप दोनो साथ मे भी लगा सकते है (जायापरणीया) की जात कहते है

नोट: जात भुखे पेट लगती है; सुबह री आरती के बाद ओर शाम की आरती से पहले पुरे दिन लगती है