श्री सोनाणा खेतलाजी का इतिहास

श्री सोनाणा खेतलाजी (गोरा भेरूजी) और श्री काला भेरूजी का निकास काशी से हैं , काशी से बापजी मंडोर (जोधपुर) पधारे यहा पर काला गोरा माँ ब्राह्मणी , माँ चामुंडा और गणेश जी के साथ विराजमान है , मंडोर से तिकी पहाड़ी आना पधारे और यहा से सोनाणा (जूनी धाम) और सोनाणा से सारंगवास (नवी धाम) आएं ।

खेतलाजी अर्थात काला-गोरा भैरुजी मुल काशी मे स्थान है बावसी काशी से मण्डोवर पधारे (जोधपुर) जो आज बडी गादी मानी जाती है वहा बावसी मारवाड गोडवाड की भुमि पर पधारे दसुरी से ७ किमी आना के पास तीकी पहाडी गुफा मे बिराजमान हुऐ, फिर वहाँ से सोनाणा और अंत मैं सारंगवास आकर स्तिथ हुए की जहाँ करीब ६०० वर्षो से ज्यादा समय से भक्तो द्वारा पूजे जा रहे हैं

खेतलाजी बावसी गणपतिजी, काला भेरुजी, चामुंडा माँ सहित बिराजमान

रिक्तिया भेरुजी काले एवं स्वेत स्वान सवारी के साथ बिराजमान

स्थापनाजी – बावसी की आंगी के रूप में परिक्रमा हेतु बिराजमान

ब्राह्मणी (बाण) माताजी और देवियों के सहित बिराजमान

श्री रामजी के परम भक्त हनुमानजी शनि देव सहित बिराजमान

केदारिया कुल मैं बहुपूजित और सतीत्व की प्रतिक श्री सती माता बिराजमान

श्री सोनाणा खेतलाजी दर्शन